देश से काला ध्न, अनैतिकता, भ्रष्टाचार, मनमानियां मिटाने के लिए
चन्द्रगुप्त की खोज मंे जुटे चाणक्य बाबा
आर.एस.शर्मा
दिल्ली, भारत विश्व का एक सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां किसी भी विषय पर अपने विचार रखने आजादी ही आजादी है। बाबा रामदेव भी देश की इस लोकतांत्रिक परम्परा का सही उपयोग करने में जुटे हुए हैं। यदि देशहित में कुछ है तो फिर तो बोलने वाले के साथ काफिला भी जुड़ जाता है और कुछ-कुछ ऐसा ही बाबा रामदेव के साथ हो रहा है। योग गुरु के नाम से अपार प्रसि(ि और शिष्य प्राप्त करने के बाद अब बाबाजी ने देश सुधार करने का बीड़ा भी उठा लिया है। भ्रष्टाचार, काला धन, अनैतिकता और प्रशासनिक लापरवाहियों और मनमानियों के विरोध में जिस प्रकार से बाबाजी ने भारत स्वाभिमान संस्था बनाई है उसको देखते हुए यही लग रहा है कि आज वह राष्ट्रहित में चाणक्य की भूमिका निभाने के लिए मैदान में कूद गए हैं। बस जरुरत है तो एक चन्द्रगुप्त की जो इनके द्वारा चलाई जाने वाली परम्परा का सही प्रकार से उपयोग और उसका निर्वाह कर सके। चाणक्य ने तो राजा घनानंद द्वारा किए गए अपमान का बदला लेने के लिए कमर कसी थी परन्तु वर्तमान में आज घनानंदों की कमी नहीं है जो हर पल देश की जनता का अपमान के साथ-साथ उनकी भावनाओं के साथ भी खेलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अक्सर नेताओं के वादे खोखले और भोथले सि( हुए है। चुनावों में किए गए वादे चुनाव जीतने के बाद अक्सर याद नहीं रहते नतीजतन आज जो देश में हो रहा है वह जनता के साथ की गई वादा खिलाफियांे का परिणाम के सिवा कुछ नहीं। कुछ ही महीनों में कॉमनवैल्थ गेम्स घोटाले, 2 जी स्पेक्ट्रम, एस बैंड घोटालों ने सरकार की पोल खोल दी है। इस पर हसन अली के मामलेे में अदालत की फटकारें बाबा रामदेव की राजनैतिक लड़ाई को जारी रखने के लिए बल दे रही है। सच्चाई तो यही है कि देश ने हर प्रकार का सरकारी रंग देखा है परन्तु अफसोस है कि कसौटी पर कोई भी खरा नहीं उतरा। क्या भाजपा तो क्या कांग्रेस और क्या गठबंधन सरकारें। सभी अपनी-अपनी भूमिका निभाने में फेल हो चुके है। ऐसे में यदि आज एक योगी और संत देश को भंवर से निकालने के लिए अपनी कटिब(ता एवं प्रतिब(ता दिखाने के लिए आगे बढ़ रहा है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। चाणक्य बने बाबा को देशहित के लिए आज नहीं तो कल कोई न कोई तो चन्द्रगुप्त मिल ही जाएगा।
शक्ति टाइम्स दिल्ली साप्ताहिक अंक 11, 13-19 मार्च 2011 में प्रकाशित
चन्द्रगुप्त की खोज मंे जुटे चाणक्य बाबा
आर.एस.शर्मा
दिल्ली, भारत विश्व का एक सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां किसी भी विषय पर अपने विचार रखने आजादी ही आजादी है। बाबा रामदेव भी देश की इस लोकतांत्रिक परम्परा का सही उपयोग करने में जुटे हुए हैं। यदि देशहित में कुछ है तो फिर तो बोलने वाले के साथ काफिला भी जुड़ जाता है और कुछ-कुछ ऐसा ही बाबा रामदेव के साथ हो रहा है। योग गुरु के नाम से अपार प्रसि(ि और शिष्य प्राप्त करने के बाद अब बाबाजी ने देश सुधार करने का बीड़ा भी उठा लिया है। भ्रष्टाचार, काला धन, अनैतिकता और प्रशासनिक लापरवाहियों और मनमानियों के विरोध में जिस प्रकार से बाबाजी ने भारत स्वाभिमान संस्था बनाई है उसको देखते हुए यही लग रहा है कि आज वह राष्ट्रहित में चाणक्य की भूमिका निभाने के लिए मैदान में कूद गए हैं। बस जरुरत है तो एक चन्द्रगुप्त की जो इनके द्वारा चलाई जाने वाली परम्परा का सही प्रकार से उपयोग और उसका निर्वाह कर सके। चाणक्य ने तो राजा घनानंद द्वारा किए गए अपमान का बदला लेने के लिए कमर कसी थी परन्तु वर्तमान में आज घनानंदों की कमी नहीं है जो हर पल देश की जनता का अपमान के साथ-साथ उनकी भावनाओं के साथ भी खेलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अक्सर नेताओं के वादे खोखले और भोथले सि( हुए है। चुनावों में किए गए वादे चुनाव जीतने के बाद अक्सर याद नहीं रहते नतीजतन आज जो देश में हो रहा है वह जनता के साथ की गई वादा खिलाफियांे का परिणाम के सिवा कुछ नहीं। कुछ ही महीनों में कॉमनवैल्थ गेम्स घोटाले, 2 जी स्पेक्ट्रम, एस बैंड घोटालों ने सरकार की पोल खोल दी है। इस पर हसन अली के मामलेे में अदालत की फटकारें बाबा रामदेव की राजनैतिक लड़ाई को जारी रखने के लिए बल दे रही है। सच्चाई तो यही है कि देश ने हर प्रकार का सरकारी रंग देखा है परन्तु अफसोस है कि कसौटी पर कोई भी खरा नहीं उतरा। क्या भाजपा तो क्या कांग्रेस और क्या गठबंधन सरकारें। सभी अपनी-अपनी भूमिका निभाने में फेल हो चुके है। ऐसे में यदि आज एक योगी और संत देश को भंवर से निकालने के लिए अपनी कटिब(ता एवं प्रतिब(ता दिखाने के लिए आगे बढ़ रहा है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। चाणक्य बने बाबा को देशहित के लिए आज नहीं तो कल कोई न कोई तो चन्द्रगुप्त मिल ही जाएगा।
शक्ति टाइम्स दिल्ली साप्ताहिक अंक 11, 13-19 मार्च 2011 में प्रकाशित
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