निरकंुश मंहगाई, बढ़ते भ्रष्टाचार और घोटाले, मनमाने टैक्स इत्यादि से लुटती रहे जनता
आर.एस.शर्मा ‘नागेश’
दिल्ली, जब रोम जल रहा था तो रोम का राजा नीरो अपने महल में चैन की बंसी बजाने में जुटा हुआ था। कमोबेश यही हाल मौजूदा सरकार का भी लग रहा है। देश में भ्रष्टाचार लपलपा रहा है, घोटाले दर घोटाले हो रहे हैं, मंहगाई डायन खाए जात है, इसके बावजूद भी जनता पर कोई न कोई टैक्स या मूल्य वृ(ि थोप दी जाती है। बिजली से ज्यादा मंहगा पानी कर दिया है फिर भी पीने को पानी नहीं। तेल मंहगा इसलिए कि उस पर टैक्स ही टैक्स लगे हुए हैं। जनता के पास खाने को, पीने को, पहनने को, रहने को कुछ बचे या न बचे, इसकी फिक्र शायद आज सरकार को नहीं रही। मगर निरकुंश मंहगाई, बढ़ते भ्रष्टाचार और घोटाले, मनमाने टैक्स इत्यादि से लुटती रहे जनता शायद सरकार यही चाहती है कि जनता जितनी उलझी रहेगी उतना सरकार के मजबूत होने का मुख्य कारण है।
वास्तव में आज जनता को ऐसा लगने लग गया है कि डायन मंहगाई नहीं सरकार ही बन गई है जो जनता को बचाने के बदले निगलने में अपना हित बेहतर समझने लग गई है। यदि ऐसा न होता तो चुनावों में भारतीय वोटरों द्वारा दिए गए वोटों की बदौलत चुनी हुई भारत सरकार जनता के साथ ऐसा अन्याय न होने देती। देश में गृहमंत्री भी है और कृषि मंत्री भी, कानून भी है, कानून मंत्री भी, पुलिस भी है, थाने भी हैं और प्रशासन भी है, इनके साथ साथ भरा-पूरा समृ( प्रशासन भी है। यदि इनके रहते हुए भी जनता परेशानियों को झेलने पर मजबूर हो जाए तो सिवाय इसके कि सरकार ही डायन है न कि कुछ अन्य जिससे जनता परेशान हो रही है। यदि सरकार सक्षम है, एकजुट है, भले ही गठबंधन की हो तो किसी की क्या मजाल है जो जमाखोरी कर सके, घोटाले कर सके, भ्रष्टाचार में लिप्त हो सके। हर साल विभिन्न टैक्स् स्त्रोतों से अरबों रुपए का राजस्व इक्ट्ठा करने वाली सरकार भी यदि मंहगाई, घोटाले, भ्रष्टाचार रोकने में सफल नहीं है तो ऐसी सरकार की देश को क्या जरुरत?
यहां किस मुद्दे की बात करें क्योंकि हर मुद्दा अपने आप में एक डायन बनकर जनता को निगलने में जुटा हुआ है। मंहगाई इतनी बढ़ चुकी है कि आम आदमी का गुजर-बसर करना मुश्किल होने लग गया है। यहां प्याज की बात नहीं करते क्योंकि प्याज के साथ-साथ आज हर खाने-पीने की चीज चाहे वह दाल हो या आटा, चीनी हो या सब्जी, सब कुछ इतना मंहगा हो चुका है कि जीना बेहाल होने लग गया है। जनता चूंकि अपने आप में उलझी हुई है इसलिए घोटाले और भ्रष्टाचारों के बारे में सोच भी नहीं सकती और यही सरकार की मंशा है कि जनता उलझी रहे और इसके अलावा कुछ सोच ही न सके।
बिजली की अनाप-शनाप मूल्य वृ(ि को दिल्ली की जनता अभी भूली नहीं कि दिल्ली जल बोर्ड दिल्ली की जनता को बिना समुचित पानी दिए इतने भारी-भरकम बिल भेजने पर उतारु हो गया है जिसका अंदाजा केवल उपभोक्ता ही लगा सकता है। आम आदमी का बिजली का बिल इतना ज्यादा शायद नहीं होगा जितना कि उसका पानी का बिल आने लग गया है। बिलों के पीछे दिए गए नम्बरों पर यदि कोई कुछ शंका मिटाना चाहता है तो अधिकारी टेलीफोन ही नहीं उठाते। आम आदमी सैंकड़ों-हजारों की विभिन्न सरकारी मदों की अदायगी में जुटा हुआ है और नेता हजारों-करोड़ के घोटाले और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। संसद की कैंटीन में सब कुछ सस्ता है और बाहर सब कुछ पहुंच से बाहर। यदि संसद की कैंटीन में उपलब्ध होने वाला खाना आम जनता को मिलने लग जाए तो जनता मंहगाई को भूल जाएगी।
इससे पहले राजग की सरकार थी और वह भी कई पार्टियों के साथ गठबंधन सरकार थी परन्तु इतनी मंहगाई कभी नहीं हुई जितनी यूपीए सरकार के समय में देखी जा रही है। यूपीए सरकार का हर कोई विशिष्ट व्यक्ति अपनी-अपनी रौ में बह रहा है। विधायक हो या सांसद बेतहाशा भत्ते बढ़ाने में जुटा हुआ है। जनता की किसी को कोई फिक्र नहीं। कांग्रेस अपने आप में उलझी है और गठबंधन अपने आप में। मंहगाई रोकने में गठबंधन भारी पड़ रहा है। राहुल के बयान भूचाल मचा रहे हैं। सरकार का विरोध बढ़ता जा रहा है। यदि यही हाल रहा और जो चल रहा है वह निरंकुश चलता रहा तो यकीनन आगामी चुनावों में कांग्रेस समेत यूपीए को भारी क्षति उठानी पड़ सकती है।
शक्ति टाइम्स दिल्ली साप्ताहिक अंक-03 16 जनवरी-22 जनवरी 2011
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